“नियति”
“नहीं मुझे किसी से नहीं मिलना औरनियति का चक्र “ बाहर गाड़ी की आवाज सुनते ही सुमन जी घर का मेन दरवाजा खोल कर बाहर निकल आईं ।उन्हें बेटे के साथ- साथ उसकी गाड़ी की पहचान हो गई थी। उनका यह रोज का काम था। मोनू के ऑफिस जाते समय दरवाजा बंद […]
“नहीं मुझे किसी से नहीं मिलना औरनियति का चक्र “ बाहर गाड़ी की आवाज सुनते ही सुमन जी घर का मेन दरवाजा खोल कर बाहर निकल आईं ।उन्हें बेटे के साथ- साथ उसकी गाड़ी की पहचान हो गई थी। उनका यह रोज का काम था। मोनू के ऑफिस जाते समय दरवाजा बंद […]
पापा आपको पता है न कि कल इंडीपेंडेंस डे है यानि… कि स्वतंत्रता दिवस!” “हाँ है तो…..क्या हुआ बताओ !” “बताना यही है कि हम लोग सब मिलकर इसे सेलिब्रेट करेंगे!” मैं खुश होकर बोली-” हाँ बेटा तुम बिल्कुल सही कह रहे हो। कल ही के दिन हमारा देश गुलामी की जंजीरों से आजाद हुआ […]
बाहर स्कूल का वैन बार -बार हॉर्न बजाए जा रहा था। पर अंश था कि घर से निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था। पता नहीं आज बैग सम्हालने में इतना टाईम क्यूँ लग रहा था। मम्मी ने जाकर अंश को टोका- ” बेटा जाओ न जल्दी गाड़ी चली जाएगी तब घर से निकलोगे […]
उफ्फ बहुत देर हो गई…..पार्टी से कोई आने ही नहीं दे रहा था,उपर से तेज मूसलाधार बारिश …..गाड़ी चलाने में ही कितनी मुश्किल हो रही है….राजीव बड़बड़ा ही रहा था कि स्ट्रीट लाइट बंद हो गई,धूप्प- अंधेरा ,झींगुर की आवाजें,पत्तों की सरसराहट,मेढ़को की कर्कश टर्र टर्र माहौल को भयभीत कर रहा था,कार स्टार्ट होने का […]
दोनों पिता-पुत्र के बीच कल से ठनी है। जंग का कारण घर के पीछे जो पुराना बरगद का पेड़ है उसी को लेकर है। जब से बेटा घर आया है एक ही रट लगा कर बैठा है कि इस बार वह बरगद के पेड़ को कटवा कर ही मानेगा। दीपक की मनसा है कि बरगद को […]
रामदिन काका ने प्रभा के कमरे के बाहर दरवाजे पर खड़े होकर आवाज लगाई…. “बहुरिया आपके बाबूजी आए हैं मिलना चाहते हैं। उन्हें बुला लूँ अंदर !” काका को ही पूरे घर के देख -रेख की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रभा जब से ब्याह कर इस घर में आई थी तब से ही देखा था […]
आज भले ही हम और हमारे बच्चे इलेक्ट्रॉनिक की दुनिया में आ चुके हैं। एक से बढ़कर एक मनोरंजक साधन है बच्चों को बहलाने के लिए। फिर भी बच्चे गायब हो जाने वाले किरदारों को ही ज्यादा पसंद करते हैं। जैसे शुरू- शुरू में शक्तिमान , सुपरमैन रामायण,महाभारत सीरियल के दिवाने होते थे और आज […]
“देखिये भैय्या ,आपको सुनने में थोड़ा कड़वा लगेगा लेकिन मुझे यह मजबूर होकर कहना पड़ रहा है कि हम पूरे खानदान भर का बोझ नहीं उठा सकते!मेरी भी अपनी जिन्दगी है। जिन्दगी की छोटी- मोटी खुशियां हैं ,बाल बच्चे हैं। मुझे उनके लिए भी सोचने की जरूरत है। बचपन से हमने जो जोड़- तोड़कर खुशियां […]
“नालायक कहीं का!”मेरी इज्जत का जरा भी परवाह नहीं है इस लड़के को! इंजीनियरिंग की डिग्री क्या मिल गई अपने आप को ज्यादा काबिल समझने लगा है। बाप का सिर झुकाने पर लगा है।मेरा सारा इज्जत प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला देगा यह लड़का! “ पिताजी का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया था। वह भैया […]
सीधे सरल और सहृदय थे हमारे गांव के शिक्षक बाबु साहब जिन्हें हर कोई मास्टर जी के नाम से संबोधित करता था। शायद ही कोई गाँव का बच्चा होगा जो उनसे अच्छी शिक्षा नहीं लिया होगा। बच्चे बुढ़े सभी उनका आदर करते थे। मास्टर जी को गुजरे दो साल हो चुके थे। पिछले साल जैसे […]
मेरी कहानी संग्रह अब एक पुस्तक और ई-पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई है। आशा है कि ये आपको पसंद आए।
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